का सरल उत्तर
प्रार्थना में क्रम से — स्तुति, कृतज्ञता, पश्चाताप, याचना और समर्पण बोलें। भाव शुद्ध हो — मातृभाषा में बोलें। भगवान भाषा नहीं, भाव देखते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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