का सरल उत्तर
नहीं, प्रातःकाल श्राद्ध वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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