का सरल उत्तर
प्रयागराज 'तीर्थराज' है — यहाँ ब्रह्माजी ने प्रथम यज्ञ किया, गंगा-यमुना-सरस्वती का त्रिवेणी संगम है, और समुद्र मंथन के अमृत की बूंदें गिरने से कुंभ मेला लगता है। माघ में यहाँ स्नान दस हजार तीर्थों के समान फलदायी है।
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