का सरल उत्तर
ये योनियाँ सिखाती हैं कि कर्म, मृत्यु-काल की आसक्ति और संस्कारों की अवहेलना आत्मा की गति तय करते हैं; धर्म और श्राद्ध-मुक्ति के मार्ग हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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