का सरल उत्तर
जप का फल 'गुह्यातिगुह्य गोप्ता त्वं' मंत्र से देव चरणों में समर्पित करते हैं — यह साधना फल का अहंकाररहित भाव से ईश्वर को प्रत्यार्पण है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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