पूजा में जप का फल कैसे समर्पित करते हैं का सबसे सीधा सार यह है: जप का फल 'गुह्यातिगुह्य गोप्ता त्वं' मंत्र से देव चरणों में समर्पित करते हैं — यह साधना फल का अहंकाररहित भाव से ईश्वर को प्रत्यार्पण है।
पूजा विधि और अनुष्ठान जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
•उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
•पूजा विधि और अनुष्ठान श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
•यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।