का सरल उत्तर
असितांग भैरव मंत्र का पुरश्चरण सवा लाख (1,25,000) जप से होता है — पुरश्चरण के बाद दशांश हवन अनिवार्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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