का सरल उत्तर
भगवान को पुष्प अर्पित करते समय 'ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि...' तथा 'नानासुगन्धपुष्पाणि यथा कालोद्भवानि च। पुष्पांजलिर्मया दत्ता गृहाण परमेश्वर॥' मंत्र बोला जाता है, जिसका अर्थ है ईश्वर से सुगंधित पुष्पों को स्वीकार करने की प्रार्थना।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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