का सरल उत्तर
राहु (सर्प का मुख) और केतु (सर्प की पूंछ) कर्म-फल के दण्ड-अधिकारी हैं — इनके मध्य सभी ग्रहों के फँसने से कालसर्प दोष बनता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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