का सरल उत्तर
'रसात्परतरं लिङ्गं न भूतो न भविष्यति' का अर्थ है: पारद से श्रेष्ठ शिवलिंग न भूतकाल में हुआ है और न भविष्य में होगा — यह शिवनिर्णय रत्नाकर का वचन है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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