का सरल उत्तर
रत्न दैत्यराज बलि के सर्वोच्च त्याग और भगवान की कृपा का अंश हैं — इसी दिव्य उत्पत्ति के कारण उनमें दैवीय ऊर्जा धारण करने की स्वाभाविक क्षमता होती है जो मंत्र से जागृत होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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