का सरल उत्तर
अधूरी मन्नतें और श्राप उग्र साधना के दौरान 'श्रापित दोष' के रूप में प्रकट होकर साधना में बाधा डालते हैं — इसलिए साधना से पहले इन्हें पूरा करना अनिवार्य है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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