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विस्तृत उत्तर
साधना शुरू करने से पहले साधक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके या उसके परिवार के पूर्वजों द्वारा मांगी गई कोई मन्नत अधूरी तो नहीं रह गई है।
अधूरी मन्नतें या किसी व्यक्ति का श्राप (बद्दुआ) उग्र साधना के दौरान नकारात्मक ऊर्जा या 'श्रापित दोष' के रूप में प्रकट हो सकते हैं, जिससे साधना में बाधा आती है।
इन दोषों का निवारण या कमिटमेंट पूरा करना साधना की सफलता के लिए आवश्यक है।
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