विस्तृत उत्तर
शरीर के ८४ अंशों का पितृ ऋण से सीधा संबंध है। शास्त्रों के अनुसार शरीर में कुल ८४ अंश होते हैं, जिनमें से २८ अंश व्यक्ति अपने जीवनकाल के भोजन, तप और कर्मों से उपार्जित करता है और ५६ अंश पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। इन ५६ पैतृक अंशों में पिता से २१, पितामह से १५ और प्रपितामह से १० अंश मिलते हैं। इन तीन पीढ़ियों से कुल ४६ अंश प्राप्त होते हैं, जो पैतृक अंशों का बड़ा भाग है। इसी प्रबल आनुवंशिक ऋण को चुकाने के लिए इन तीन पीढ़ियों को मुख्य पिण्ड दिया जाता है।
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