विस्तृत उत्तर
साधना काल में निम्नलिखित पाँच विकारों से मन को दूर रखना परम आवश्यक है, अन्यथा साधना में प्रगति बाधित हो सकती है:
१. काम
२. क्रोध
३. लोभ
४. मत्सर
५. अहंकार
मातंगी साधना काल में वर्जित पाँच विकार: (1) काम, (2) क्रोध, (3) लोभ, (4) मत्सर, (5) अहंकार। इनसे दूर न रहने पर साधना में प्रगति बाधित होती है।
साधना काल में निम्नलिखित पाँच विकारों से मन को दूर रखना परम आवश्यक है, अन्यथा साधना में प्रगति बाधित हो सकती है:
१. काम
२. क्रोध
३. लोभ
४. मत्सर
५. अहंकार
इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ
पौराणिक पर आपको नियम और सावधानियाँ से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।