विस्तृत उत्तर
माँ मातंगी की साधना में निम्नलिखित सावधानियाँ अत्यंत आवश्यक हैं:
— माँ मातंगी की साधना, विशेषकर उच्छिष्ट या कर्ण मातंगी जैसी गूढ़ साधनाएँ, अत्यंत सावधानी और योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए।
— साधना को गुप्त रखना श्रेयस्कर है।
— साधक को शांत स्वभाव के देवता की साधना को प्राथमिकता देनी चाहिए; क्रोधित या उग्र देवता की साधना में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि त्रुटि होने पर गंभीर नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं।
— साधना काल में काम, क्रोध, लोभ, मत्सर और अहंकार जैसे पाँच विकारों से मन को दूर रखना परम आवश्यक है, अन्यथा साधना में प्रगति बाधित हो सकती है।





