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विस्तृत उत्तर
पितृ तत्त्व का अर्थ केवल मृत पिता या माता-पिता नहीं है। शास्त्रों में पितृ एक व्यापक ब्रह्मांडीय और पारलौकिक सत्ता है। मृतात्मा दाह-संस्कार के बाद सूक्ष्म वायव्य शरीर धारण करती है और सपिण्डीकरण से पहले प्रेत कहलाती है। सपिण्डीकरण के बाद वही आत्मा पितृ पद प्राप्त करती है। मनुष्य पितरों की तृप्ति के लिए वंशज श्राद्ध और तर्पण करते हैं।
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