विस्तृत उत्तर
चूँकि यह स्तोत्र 'अघोरास्त्र' है और उग्र शक्ति से युक्त है, इसलिए साधक के लिए उच्च स्तर की पवित्रता और नैतिक अनुशासन आवश्यक है:
- 1भक्त-अपराध से बचाव: किसी भी वैष्णव, संत, उपासक, या भक्त की निंदा या अपमान न करें — यह सभी पुण्यों को नष्ट कर देता है।
- 1श्रापित दोष और मन्नत: साधना शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि परिवार की कोई मन्नत अधूरी न हो।
- 1पवित्रता और सात्विक लक्ष्य: यह स्तोत्र षट्कर्मों को नष्ट करने के लिए है, न कि उनके तामसिक प्रयोग के लिए। केवल कल्याणकारी, रोग निवारक, और रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए ही करें।





