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अंतिम संस्कार📜 गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण (Aaj Tak verified)2 मिनट पठन

मरणासन्न व्यक्ति को गंगाजल क्यों पिलाते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

गंगा = पापनाशिनी (स्कंद पुराण)। गरुड़ पुराण: गंगाजल आत्मा शुद्ध करता है। मोक्ष सहायक (विष्णु चरण जल)। मुख में तुलसी+गंगाजल बूँदें। गंगाजल न हो = शुद्ध जल+तुलसी। भाव प्रधान।

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विस्तृत उत्तर

मरणासन्न व्यक्ति को गंगाजल पिलाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना गया है।

कारण

  1. 1गंगा = पापनाशिनी: गंगाजल सभी पापों को नष्ट करता है (स्कंद पुराण)। अंतिम समय में गंगाजल = पापों की शुद्धि।
  2. 2आत्मा शुद्धि: गरुड़ पुराण (Aaj Tak verified): *'गंगाजल आत्मा को शुद्ध कर देता है। अंतिम समय में मरने वाले के मुख में गंगाजल डालने से व्यक्ति पर बड़ा उपकार होता है।'*
  3. 3मोक्ष सहायक: गंगा विष्णु के चरणों से निकली — गंगाजल = विष्णु स्पर्श = मोक्ष मार्ग।
  4. 4शारीरिक शांति: गंगाजल गले को तर करता है — मरणासन्न व्यक्ति को शारीरिक राहत।
  5. 5अंतिम संस्कार: गंगाजल = अंतिम शुद्धि — आत्मा पवित्र होकर शरीर छोड़ती है।

विधि: मरणासन्न व्यक्ति के मुख में तुलसी दल + गंगाजल की कुछ बूँदें डालें। यदि पी न सकें तो होठों पर लगाएँ।

ध्यान दें: गंगाजल न मिले तो किसी भी पवित्र नदी/तीर्थ का जल या शुद्ध जल + तुलसी दल — भाव प्रधान है।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण (Aaj Tak verified)
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