विस्तृत उत्तर
मरणासन्न व्यक्ति को गंगाजल पिलाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना गया है।
कारण
- 1गंगा = पापनाशिनी: गंगाजल सभी पापों को नष्ट करता है (स्कंद पुराण)। अंतिम समय में गंगाजल = पापों की शुद्धि।
- 2आत्मा शुद्धि: गरुड़ पुराण (Aaj Tak verified): *'गंगाजल आत्मा को शुद्ध कर देता है। अंतिम समय में मरने वाले के मुख में गंगाजल डालने से व्यक्ति पर बड़ा उपकार होता है।'*
- 3मोक्ष सहायक: गंगा विष्णु के चरणों से निकली — गंगाजल = विष्णु स्पर्श = मोक्ष मार्ग।
- 4शारीरिक शांति: गंगाजल गले को तर करता है — मरणासन्न व्यक्ति को शारीरिक राहत।
- 5अंतिम संस्कार: गंगाजल = अंतिम शुद्धि — आत्मा पवित्र होकर शरीर छोड़ती है।
विधि: मरणासन्न व्यक्ति के मुख में तुलसी दल + गंगाजल की कुछ बूँदें डालें। यदि पी न सकें तो होठों पर लगाएँ।
ध्यान दें: गंगाजल न मिले तो किसी भी पवित्र नदी/तीर्थ का जल या शुद्ध जल + तुलसी दल — भाव प्रधान है।





