विस्तृत उत्तर
मंदिर में प्रसाद दाहिने हाथ से लेने का शास्त्रीय विधान है:
- 1दाहिना = शुभ: भारतीय परम्परा में दाहिना हाथ = शुभ, पवित्र। सभी शुभ कार्य (दान, ग्रहण, आचमन, तिलक) दाहिने हाथ से।
- 1देव हस्त: दाहिना हाथ = 'देव हस्त' कहलाता है। बायाँ = पितृ हस्त। प्रसाद = देवता का अनुग्रह — देव हस्त से ग्रहण करना उचित।
- 1ऊर्जा ग्रहण: योग/तंत्र शास्त्र में दाहिना हाथ = सूर्य नाड़ी (पिंगला) से जुड़ा = सक्रिय, ग्रहणशील। बायाँ = चन्द्र नाड़ी (इड़ा)। दैवी ऊर्जा दाहिने हाथ से अधिक प्रभावी ढंग से शरीर में प्रवेश करती है (शास्त्रीय मान्यता)।
- 1स्वच्छता: परम्परागत रूप से बायाँ हाथ शौच कर्म के लिए प्रयुक्त — अतः भोजन/प्रसाद दाहिने हाथ से।
- 1विधि: प्रसाद लेते समय दोनों हाथ जोड़कर (अंजलि मुद्रा) लें, किन्तु दाहिना हाथ ऊपर रहे। या केवल दाहिने हाथ से लें, बायाँ नीचे सहारे में।





