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विस्तृत उत्तर
पिण्डदान के समय कर्ता ध्यान करता है कि उसके शरीर में उपस्थित गुणसूत्र जिन पूर्वजों से प्राप्त हुए हैं, वे परलोक में तृप्त हों। इस तरह पिण्डदान वंश और पूर्वजों से जुड़े सूक्ष्म संबंध को तृप्त करता है।
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