का सरल उत्तर
इंद्र के अहंकार से दुर्वासा का शाप → तीनों लोक श्रीहीन। विष्णु का निर्देश: बिना मंथन के खोई श्री नहीं मिलती। मंदराचल पर्वत (मथानी) और वासुकि (रस्सी) से मंथन — फिर माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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