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क्षीरसागर मंथन⏱ 2 मिनट पठन

समुद्र मंथन में लक्ष्मी क्यों प्रकट हुईं?

इंद्र के अहंकार से दुर्वासा का शाप → तीनों लोक श्रीहीन। विष्णु का निर्देश: बिना मंथन के खोई श्री नहीं मिलती।

संक्षिप्त उत्तर

इंद्र के अहंकार से दुर्वासा का शाप → तीनों लोक श्रीहीन। विष्णु का निर्देश: बिना मंथन के खोई श्री नहीं मिलती। मंदराचल पर्वत (मथानी) और वासुकि (रस्सी) से मंथन — फिर माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं।

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विस्तृत उत्तर

पुराणों (विशेषकर विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अष्टम स्कंध) में माँ लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने की अत्यंत प्रसिद्ध और प्रतीकात्मक कथा का वर्णन है।

कथा का आरंभ देवराज इंद्र के अहंकार और सत्ता-मद से होता है। महर्षि दुर्वासा ने इंद्र को अत्यंत दुर्लभ और दिव्य पुष्पमाला भेंट की। इंद्र ने उस माला को अपने हाथी ऐरावत के मस्तक पर डाल दिया और ऐरावत ने उसे पृथ्वी पर फेंक दिया। इससे कुपित दुर्वासा ने शाप दिया कि तीनों लोक 'श्रीहीन' हो जाएँ।

देवताओं के श्रीहीन होने और असुरों से पराजित होने पर वे भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने उन्हें क्षीरसागर का मंथन करने का निर्देश दिया। भगवान ने कहा कि बिना मंथन (कठोर परिश्रम और तप) के खोई हुई श्री को पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता।

तदनुसार, मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकि नाग को रस्सी बनाकर देवताओं और असुरों ने मिलकर मंथन आरंभ किया। विष, अलक्ष्मी और अनेक दिव्य रत्नों के प्रकट होने के बाद, क्षीरसागर से माँ पद्मा लक्ष्मी प्रकट हुईं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

समुद्र मंथन में लक्ष्मी क्यों प्रकट हुईं को संदर्भ सहित समझें

समुद्र मंथन में लक्ष्मी क्यों प्रकट हुईं का सबसे सीधा सार यह है: इंद्र के अहंकार से दुर्वासा का शाप → तीनों लोक श्रीहीन। विष्णु का निर्देश: बिना मंथन के खोई श्री नहीं मिलती। मंदराचल पर्वत (मथानी) और वासुकि (रस्सी) से...

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क्षीरसागर मंथन प्रश्नोत्तर
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