विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के अनुसार, अलक्ष्मी ने भगवान विष्णु से पूछा कि मेरा स्थान कहाँ होगा? तब भगवान ने निर्देश दिया कि जो लोग अतिथियों का अपमान करते हैं, जो घर गंदे रहते हैं, जहाँ कलह होती है, जहाँ वेद और धर्म की निंदा होती है और जहाँ पूजा नहीं होती, उन स्थानों और उस धन पर तुम्हारा (अलक्ष्मी का) ही अधिकार होगा।
श्रीसूक्त में भी स्पष्ट रूप से प्रार्थना की गई है कि 'क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्' (मैं क्षुधा और पिपासा से युक्त मलिन अलक्ष्मी का नाश करता हूँ)।
तात्पर्य यह है कि जब तक जीवन, घर और मन से अलक्ष्मी (आलस्य, गंदगी, दरिद्रता के विचार, पाप) का निष्कासन नहीं होता, तब तक शुद्ध 'श्री' या लक्ष्मी की प्राप्ति असंभव है।





