का सरल उत्तर
संकर्षण की अग्नि नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य को जलाती है और महर्लोक तक पहुँचती है — पर सत्यलोक इससे पूर्णतः सुरक्षित रहता है। योगी इस समय सत्यलोक में शरण लेते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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