का सरल उत्तर
वृत्र = अज्ञान, अंधकार और सूखे का सर्पाकार दानव जो नदियों (ज्ञान-जीवन के प्रवाह) को रोकता था। सरस्वती ने इसका नाश किया इसलिए 'वृत्रघ्नी' — बाधाओं को दूर करने वाली और शत्रुओं का संहार करने वाली शक्ति।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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