का सरल उत्तर
सत्यलोक की करुणा अद्वैत ज्ञान से उत्पन्न है — जब जीव समस्त प्राणियों में स्वयं को देखता है तो उनकी पीड़ा उसकी अपनी पीड़ा बन जाती है। यह 'सर्वम् ब्रह्म' की अनुभूति है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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