का सरल उत्तर
सत्यलोक विशुद्ध सत्वगुण से निर्मित है — रज-तम का प्रवेश नहीं। इसीलिए यहाँ शोक, जरा, मृत्यु, पीड़ा और उद्वेग का पूर्णतः अभाव है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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