का सरल उत्तर
सैकड़ों साल पहले बंगाल में हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक 'सत्य पीर' की पूजा होती थी। विद्वानों का मानना है कि समय के साथ उसी 'सत्य पीर' परंपरा को पुराणों में संस्कृत में लिखकर 'सत्यनारायण' पूजा का रूप दे दिया गया।
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