का सरल उत्तर
मंत्र: 'ॐ ह्रीं लक्ष्मी दुर्भाग्या नाशिनी सौभाग्य प्रदायिनी ह्रीं स्वाहा।' इस जप से साधक 'अग्निपूत' और 'वायुपूत' होता है, सांसारिक ऐश्वर्यों में लिप्त नहीं होता और अंततः परम पद (मोक्ष) प्राप्त करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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