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सरल उत्तर

'शंकुकर्ण' नाम का अर्थ और व्युत्पत्ति क्या है?

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'शंकु' (तीक्ष्ण/नुकीला) + 'कर्ण' (कान) = ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने में सक्षम सत्ता। यह शिवलिंग नाद-ब्रह्म का प्रतीक है — यहां मंत्र ब्रह्मांडीय ऊर्जा से अनुनाद स्थापित कर तत्काल फलित होते हैं।

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काशी के शिवलिंग

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