का सरल उत्तर
पूजा कर सकता — नशे में नहीं। गीता(9.30): दुराचारी भी भक्ति=साधु। शुद्ध अवस्था(स्नान+शांत मन)=पूजा मान्य। पूजा=शराब छोड़ने का मार्ग। भक्ति=सबसे बड़ा नशा मुक्ति।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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