का सरल उत्तर
शव से शिव (जीव से ब्रह्म) की यात्रा अत्यंत दुर्गम है — इसका सबसे बड़ा संदेश है सद्गुरु की शरण लेना। गुरु ही वह ध्रुव तारा है जो संसार-सागर से पार ले जाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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