का सरल उत्तर
शिव = 'आदियोगी' — वेदों में 'महातपा', 'तपस्वी', 'योगी' कहकर वंदना। जब साधक अष्टांग योग से मन मौन कर लेता है तो शिव का साक्षात्कार अपने भीतर होता है — वे बाहरी देवता नहीं, साधक की परम चेतना (सच्चिदानंद/परब्रह्म) बन जाते हैं।
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