का सरल उत्तर
शिव पुराण (2.1.14): 5 लाख जप = भगवान शिव के प्रत्यक्ष दर्शन और समस्त कामनाएं पूर्ण; 10 लाख जप = अकल्पनीय पुण्य। कलियुग में 5 लाख (चार गुना) जप अनुशंसित, सवा लाख न्यूनतम प्रामाणिक संख्या।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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