का सरल उत्तर
क्योंकि वैराज देवगणों का स्थूल पाञ्चभौतिक शरीर नहीं होता; वे अशरीरी चेतनामय स्वरूप हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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