📖
विस्तृत उत्तर
शिव पुराण के अनुसार तपोलोक में रहने वाले वैराज देवगणों का कोई स्थूल शरीर नहीं होता। वे अमूर्त या अशरीरी होते हैं। वे चेतनामय प्रकाश-स्वरूप और ज्ञान-स्वरूप हैं। चूँकि उनका शरीर भौतिक पंचमहाभूतों से निर्मित पाञ्चभौतिक स्थूल शरीर नहीं होता, इसलिए वे बुढ़ापा, रोग, थकान, शोक और मृत्यु के लौकिक भय से मुक्त रहते हैं। इसी कारण उन्हें अमूर्त कहा गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?




