का सरल उत्तर
पूजा में मन शांत: गीता (9.26): शुद्ध भाव से अर्पण = भगवान स्वीकार करते हैं। उपाय: पूर्व में 5 गहरी साँसें। 'ॐ नमः शिवाय' का लयबद्ध जप। शिव के रूप-गुण का स्मरण (नारद भक्ति सूत्र 54)। धूप-सुगंध। घंटी = नाद-ब्रह्म। धीमे भजन। शिव पुराण: भावपूजा > बाह्य पूजा।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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