का सरल उत्तर
शिव पुराण का यह प्रसंग दर्शाता है — सृष्टि की इच्छा भी अविद्या है। सत्यलोक में भी जब तक सृष्टि-इच्छा है तब तक माया का सूक्ष्म प्रभाव रहता है। तप और शिव-कृपा से ही इसे पार किया जा सकता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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