का सरल उत्तर
श्राद्ध से प्रेत 'पितर' की श्रेणी में आता है, तृप्ति मिलती है और प्रेत योनि से मुक्ति होती है। षोडश श्राद्ध और वार्षिक पितृपक्ष श्राद्ध से प्रेत-आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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