का सरल उत्तर
श्राद्धसारः नृसिंह प्रसाद ग्रन्थ का प्रसिद्ध भाग है, जो श्राद्ध के सिद्धांतों का सार-संक्षेप प्रस्तुत करता है। श्राद्ध का अर्थ है पितृ-कर्म, और सार का अर्थ है सारांश। यह याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 की सटीक व्याख्या करता है, और तिथि-वार काम्य फलों का स्पष्ट संकलन देता है। इसी के अनुसार प्रतिपदा को कन्या, द्वितीया को कन्यावेदिन और पशू वै, तृतीया को अश्व, चतुर्थी को क्षुद्र पशु, पञ्चमी को पुत्र, षष्ठी को द्यूत विजय, सप्तमी को कृषि सफलता, और अष्टमी को व्यापार लाभ की प्राप्ति होती है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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