का सरल उत्तर
श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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