स्तोत्र में लास्य और तांडव नृत्य का क्या अर्थ है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
लास्य = देवी का कोमल, सृजनात्मक नृत्य (सृष्टि का प्रतीक); तांडव = शिव का उग्र, प्रलयकारी नृत्य (संहार का प्रतीक)। दोनों एक ही परम सत्ता के पहलू हैं।
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