का सरल उत्तर
सूरदास के पद बाल-लीला के वात्सल्य-भाव, माधुर्य-भक्ति और विरह-भाव से कृष्ण-भक्ति जागृत करते हैं। 'मैया मोरी मैंने माखन नाहीं खायो' जैसे पद सीधे हृदय तक पहुँचते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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