का सरल उत्तर
स्वर्लोक में जितने पुण्य उतने समय। गीता (9.21) कहती है — पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर लौटना पड़ता है। यह अस्थायी निवास है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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