का सरल उत्तर
ऋग्वेद (1.22.20): 'तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः।' अर्थ: ज्ञानी और योगारूढ़ पुरुष विष्णु के उस परम पद (वैकुंठ) का निर्बाध दर्शन करते हैं — जैसे आकाश में सूर्य रूपी नेत्र। यह मंत्र विष्णु को मोक्ष का अंतिम लक्ष्य सिद्ध करता है।
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