का सरल उत्तर
तन्त्रोक्त रात्रिसूक्त ब्रह्मा जी द्वारा महामाया योगनिद्रा की स्तुति है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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