का सरल उत्तर
तपोलोक वैराग्य, षड्रिपु-नाश, ब्रह्म-ध्यान और वासुदेव-परायण साधना से प्राप्त होता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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