का सरल उत्तर
तपोलोक के तपस्वी शुद्ध चित्त, ऊर्ध्वरेता, जितेंद्रिय, विकाररहित और समाधिस्थ होते हैं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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