का सरल उत्तर
जरूरी नहीं — भगवान भाव देखते(गीता)। स्वयं प्रार्थना=दिखावा पूजा से अधिक। पुरोहित सहायक(वैदिक मंत्र/विधि)। ज़बरदस्ती/भय दिखाने वालों से बचें। श्राद्ध/पिंडदान=पुरोहित, सामान्य दर्शन=स्वयं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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